Wednesday, 16 September 2015

हिंदुस्तान, पाकिस्तान में अंतर क्या? दोनों सवेदन विहीन पाकिस्तान ने 14 साल के बच्चे को फांसी चढ़ा दी| हिंदुस्तान ने 12 , 14 के बच्चों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी | निर्धनता , अज्ञानता के चलते दोनों देशो में बाल अधिकार कानून रहते हुए भी अपने को नाबालिक साबित नही कर पाये |

हिंदुस्तान, पाकिस्तान में अंतर क्या? दोनों सवेदन विहीन पाकिस्तान ने 14 साल के बच्चे को फांसी चढ़ा दी| हिंदुस्तान ने 12 , 14 के बच्चों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी | निर्धनता , अज्ञानता के चलते दोनों देशो में बाल अधिकार कानून रहते हुए भी अपने को नाबालिक साबित नही कर पाये |                                                                                 माननीय कैलाश सत्यार्थी नोवल पुरस्कार विजेता आपने सैकड़ो नबालिको को होटलों फैक्ट्रीयो और बंधुवा मजदूरी से छुटकारा दिलाकर उनका बचपन बचाया है क्युंकि उपरोक्त कानून से डरते है लेकिन राजपाल, मुख्यमंत्री और न्यायधिष कानून से नही डरते है| सवेधनविहीन होकर वनराजी आदिवासी के नबालिको को  न्यायधिष ने आजीवन कारावास की सजा सुना दी जिन से मिलने वाला तथा पैरवी करने वाला कोई नही| पेरोल उनके लिए एक दिव्य सपने की तरह बाल संरक्षक आयोग तथा अन्यो के जांच में कई बार नाबालिक साबित हो चुके है.     फिर भी रिहाई नही होती     बिना पेरोल के  आजीवन कारावास मृत्यु दंड से भी कठोर सजा है|                                   

(माननीय सुप्रीम कोर्ट भारत सरकार)     

                                                                                                                                                                                                                

Tuesday, 8 September 2015

रिहाई के लिये
दिल नही पसीजा डॉ  कुरैशी का 

 
 
 डॉ कुरैशी प्रशिक्षु न्यायिक मजिस्ट्रेटों को नसीयत दे गए गरीबों, लाचारों, बेबसों के लिये लेकिन स्वयं कार्य कर गए साधन संम्पन्न  राजनीतिक पहुंच  वालों  को सजा से मुक्त करके माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अवमानना से क्या यही लोकतंत्र है?

चाइल्ड कमीशन के रिपोर्ट पर भी नाबालिग आदिवासियों की रिहाई नहीं करती उत्तराखण्ड शासन


चाइल्ड कमीशन के रिपोर्ट पर भी नाबालिग आदिवासियों की रिहाई नहीं करती उत्तराखण्ड  शासन 



जघन्य अपराधियों को गैर कानूनी तरीके से आजीवन कारावास से मुक्ति दी है उत्तराखण्ड शासन ने RTI

महामहिम राज्यपाल को समानता से जबाबदेही से कार्य करना चाहिये  राष्ट्र हित मे तभी देश महान कहलायेगा मेरे पास सबूतों  के ढेर है नहीं है  तो पैसा क्योंकि देश में  इंशाफ़ मिलता है पैसों  से अवलोकन करे महामहिम को लिखे आवेदन का निर्भया हत्या बलात्कार  में नाबालिग को मात्र २ साल की सजा वयस्कों को म्रत्युदंड़ लेकिन उत्तराखण्ड  मे १२ - १४ साल के उम्र से वनराजी आदिवासियों को आजीवन कारावास